मंत्र का महत्व
वर्तमान समय में खान-पान और रहन-सहन ऐसा हो गया है कि लोगों की बौद्धिक क्षमता धीरे-धीरे कम होती जा रही है। बार-बार समझाई और याद कराई गई बातें भी लोग भूल जाते हैं, जिसके कारण अनेक व्यक्ति जीवन में असफल हो जाते हैं।
जीवन के किसी भी क्षेत्र में ऊँचाई प्राप्त करने के लिए मस्तिष्क का तेज और स्थिर होना अत्यंत आवश्यक है। जिसका मस्तिष्क जितना सशक्त और स्पष्ट होगा, वह व्यक्ति उतना ही अधिक सफल होगा।
मस्तिष्क को तेज करने के लिए लोग दवाइयाँ लेते हैं, बड़ी-बड़ी साधनाएँ करते हैं और एकांत स्थान का वातावरण सुनिश्चित करते हैं।
लेकिन आज जो स्वयं सिद्ध मंत्र आपको दिया जा रहा है, वह अत्यंत अलौकिक और प्रभावशाली है।
अनेक साधक यह कहते हैं कि वे मंत्र पढ़ तो लेते हैं, लेकिन उन्हें मंत्र याद नहीं रहता।
जब किसी तंत्र-मार्ग पर चलने वाले साधक को मंत्र ही स्मरण न रहें, तो वह उग्र साधनाओं या श्मशान साधनाओं में आने वाले संभावित खतरों से स्वयं की रक्षा कैसे कर पाएगा?
इसलिए एक सफल साधक बनने के लिए मस्तिष्क का सशक्त होना और विभिन्न विद्याओं का स्मरण रहना अत्यंत आवश्यक है। कौन-सी परिस्थिति में किस मंत्र की आवश्यकता पड़ जाए, यह कोई नहीं जानता।
सभी मार्गों के साधकों के लिए उपयोगी
यह मंत्र केवल तंत्र-मार्ग तक सीमित नहीं है।
यदि कोई व्यक्ति किसी भी मार्ग से विद्या, ज्ञान, अध्ययन या साधना कर रहा है और इस मंत्र का नियमित जप करता है, तो उसकी बौद्धिक स्थिति अत्यंत सुदृढ़ हो जाती है।
जो भी ज्ञान वह पढ़ता या सीखता है, वह उसे दीर्घकाल तक स्मरण रहता है और वह उसे भूलता नहीं।
इसी कारण ऐसे साधक या विद्यार्थी बड़े-बड़े इंटरव्यू, परीक्षाएँ और नौकरियाँ बहुत सहजता से प्राप्त कर लेते हैं।
🕉️ संकल्प सहित जप-विधि
1️⃣ संकल्प (जप प्रारंभ से पूर्व)
संकल्प मंत्र:
“ॐ विष्णुर्विष्णुर्विष्णुः।
अद्य (तिथि) (वार) (नक्षत्र)
(स्थान) स्थितः अहं (अपना नाम)
(गोत्र) गोत्रोत्पन्नः
मम बुद्धि-स्मरण-शक्ति-वाक्-शुद्धि
एवं कंठ-माधुर्य-वृद्ध्यर्थं
सरस्वती-प्रसाद-सिद्ध्यर्थं
एतत् मंत्रजपं करिष्ये।”
(इसके बाद दोनों हाथ जोड़कर माता सरस्वती का ध्यान करें।)
2️⃣ जप-विधि (सामान्य)
-
स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनें
-
लाल या सफेद आसन पर बैठें
-
पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख रखें
-
शुक्रवार से आरंभ करना श्रेष्ठ
-
सामने दीपक जलाएँ (घी या तिल का तेल)
-
माता सरस्वती का स्मरण करें
मंत्र:
-
प्रतिदिन 11 बार जप
-
जप के बाद 1 मिनट मौन रखें
-
फिर अपने दैनिक कार्यों में लग जाएँ
🎓 विद्यार्थियों के लिए विशेष निर्देश
उद्देश्य:
स्मरण-शक्ति बढ़ाना, विषय शीघ्र याद होना, भूलने की समस्या दूर करना
विधि:
-
पढ़ाई शुरू करने से पहले
👉 इस मंत्र का 11 बार जप करें -
फिर जिस विषय / पाठ / सूत्र को याद करना हो, उसे पढ़ें
-
परीक्षा के दिनों में
👉 सुबह 11 बार + रात को 11 बार जप करें
विशेष लाभ:
-
विषय शीघ्र याद होता है
-
पढ़ा हुआ ज्ञान दीर्घकाल तक स्मरण रहता है
-
मानसिक भ्रम और घबराहट समाप्त होती है
-
इंटरव्यू और परीक्षाओं में आत्मविश्वास बढ़ता है
📌 नियम:
जप के समय मोबाइल, टीवी आदि से दूर रहें।
🎤 गायकों, वक्ताओं एवं प्रवक्ताओं के लिए विशेष निर्देश
उद्देश्य:
कंठ-शुद्धि, मधुर आवाज, स्पष्ट उच्चारण, प्रभावशाली वाणी
विधि:
-
प्रातः स्नान के बाद
-
खाली पेट या हल्का जल पीकर
-
शांत स्थान में बैठकर
-
इस मंत्र का प्रतिदिन 21 बार जप करें
अतिरिक्त अभ्यास (जप के बाद):
-
5 मिनट तक
👉 “ॐ” का दीर्घ उच्चारण -
गुनगुने जल से कुल्ला
-
तीखा, बहुत ठंडा या अत्यधिक तला भोजन न लें
विशेष लाभ:
-
आवाज में मधुरता आती है
-
गला साफ रहने लगता है
-
रुक-रुक कर बोलने की समस्या समाप्त होती है
-
प्रवचन, गायन और मंच-भाषण में प्रभाव बढ़ता है
⏳ अवधि और नियम
-
न्यूनतम 21 दिन नियमित जप
-
ब्रह्मचर्य, सात्त्विक भोजन लाभ को बढ़ाता है
-
मंत्र को श्रद्धा और विश्वास के साथ करें
-
बीच में जप न तोड़ें